Sunday, July 21, 2013

हसरते नादानी में

हसरते नादानी में ,

यूँ सब कुछ लुटा बैठे,

जो कभी सोचा न था,

ऐसा भी कुछ कर बैठे ,

जो न था मंजूर ,

मुक़द्दर को ,

उसकी सजा भी,

भुगत बैठे ,

ढूंढ़ा था बड़ी मुश्किल से,

साथी राह ए मंजिल का,

उसको भी हम,

बीच राह में ही गवां बैठे ,

जो हसरत थी दिल में,

उसके लिये अपनी दुनिया लुटा बैठे ,

चलना था साथ तेरे ,

तेरा ही विश्वास लुटा बैठे,



11 comments:

  1. क्या बात है वाह वाह वाह ...बहोत खुब

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  2. सुंदर भाव
    बेहतरीन रचना
    बधाई

    आग्रह है मेरे ब्लॉग में भी पधारें भी सम्मलित हों
    केक्ट्स में तभी तो खिलेंगे--------

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  3. बहुत खुबसूरत रचना !!

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  4. .........बहुत सुंदर !
    पहली बार आपके ब्लॉग को पढ़ा मुझे आपका ब्लोग बहुत अच्छा लगा ! मेरे ब्लोग मे आपका स्वागत है

    राज चौहान
    http://rajkumarchuhan.blogspot.in

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  5. हिन्दी ब्लॉगजगत के स्नेही परिवार में इस नये ब्लॉग का और आपका मैं संजय भास्कर हार्दिक स्वागत करता हूँ.

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  6. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  7. बहुत भी सुंदर भाव अभिव्यक्त हुये इस रचना, बहुत शुभकामनाएं.

    रामराम.

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  8. बहुत ही सुंदर

    यहाँ भी पधारे
    गुरु को समर्पित
    http://shoryamalik.blogspot.in/2013/07/blog-post_22.html

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  9. बहुत सुन्दर....

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  10. इस नादानी पे किसी का बस नहीं होता ...
    स्वागत है आपका ब्लॉग जगत में ..

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  11. क्या करें आखिर हसरतें वेवकूफ जो होती हैं...सार्थक प्रस्तुति।

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